Posted by: Hemant on: December 30, 2010
कभी ज़िंदगी एक पल में गुज़र जाती है
कभी ज़िंदगी भर एक पल नही गुज़रता
इंद्र की ज़िंदगी में भी
एक ऐसा ही पल रुक गया था
जिसे वो आरती के नाम से पेह्चान सकता था
रात गुज़र रही थी,
लेकिन वो एक पल
सारी रात पर भारी था
जाने क्या सोच कर नही गुज़रा, एक पल रात भर नही गुज़रा“
जाने क्या सोच कर नही गुज़रा
एक पल रात भर नही गुज़रा
अपनी तन्हाई का
औरो से ना शिकवा करना
तुम अकेले ही नही हो
सभी अकेले हैं
येह अकेला सफ़र नही गुज़रा
जाने क्या सोच कर नही गुज़रा
दो घड़ी जीने की मोहलत
तो मिली है सबको
तुम भी मिल जाओ
घड़ी भर को
येह गम होता है
एक घड़ी का सफ़र नही गुज़रा
जाने क्या सोच कर नही गुज़रा
जाने क्या सोच कर नही गुज़रा
एक पल रात भर नही गुज़रा
– गुलजार